Shivay!

Sunday, February 15, 2026



कहते हैं कि शिव हर किसी के जीवन में अलग ही तरह से आते हैं।

और जब शिव आगमन करते हैं तो वे आपको कभी अकेला नहीं छोड़ते।
एक बार शिव से परिचय हो जाने के बाद वे जीवन के हर मोड़ पर साथ रहते हैं।

यदि ऐसा है तो शिव एक नहीं हो सकते। जब जिसे, जिस समय शिव की आवश्यकता होती है, वे उसे उसी रूप में प्राप्त होते हैं। बस एक पवित्र संबंध की आवश्यकता होती है — ऐसा संबंध जैसा स्वयं से बनाया जाता है -

The one that is full of truth honesty and transparency ! This quality is hard to find in human beings !

यूँ तो शिव हर चीज़ में वास करते हैं।

वे एक संपन्न पुरुष हैं, जो किसी भी स्थिति में संयम नहीं खोते ! 

The divine masculine who knows nothing but love, forgiveness and holding space for his Parvati !

पार्वती के साथ हों या उनके विरह में — उनका प्रेम बस प्रेम है, और कुछ नहीं।
न किसी प्रकार का अहंकार,
न स्वयं को श्रेष्ठ या हीन समझने का भाव,
No score keeping ! 

Always guiding her through his presence and absence both !

देवों के देव,
दानवों के उद्धारकर्ता,
पशुओं के स्वामी,
नंदी के सर्वस्व,

महायोगी,
कैलाश के वासी।

उन्होंने विष ग्रहण कर इस संसार को दूषित होने से बचाया, पर उनकी त्रिनेत्र दृष्टि से मानो पूरी सृष्टि को भस्म होने में एक क्षण भी न लगे।

चँद्रमा, रुद्राक्ष , डमरू, त्रिशूल 

ध्यान, ज्ञान, समाधि — सब उनके ही नाम हैं।

यदि सब कुछ ही शिव है, तो उन्हें एक ही रूप में कैसे समझा जा सकता है? 

उनका सुंदर रूप हमें अपने विचारों में उनके समीप ले जा सकता है, पर वास्तव में शिव एक अवस्था हैं।

शायद वह एक मनःस्थिति है — जब मेरे भीतर का “मैं” “शिव” हो जाएगा… जब स्वयं में “मैं” शेष नहीं रहेगा।

वह अवस्था जो जीवन के सत्य स्वरूप को समझने में एक रोशनी बनकर रहती है।

The state that brings clarity and truth !

शिव की यह अवस्था शक्ति द्वारा पूर्ण होती है।

शक्ति, जो एक ऊर्जा है।

वह ऊर्जा जो जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति तक पहुँचाती है ! 

The one that is always moving.. always creating !

वह ऊर्जा जो शिव को शव नहीं होने देती।

The energy that takes the soul which is taking this so called journey of life to its real home !!

इस पूरी प्रक्रिया में शिव अपनी शक्ति के साथ एक ऐसा सुंदर नृत्य करते हैं, which represents sacred union !

The scared union that brings bliss .. the one that nothing is needed after that ! 

The union when all separation ends !

The union of Shivaratri ! The union that brings completeness !